चलो आज फिर खुद से दोस्ती कर लें,

खुद का हाथ फिर खुद से थाम लें,

रिश्तों के भंवर में उलझी अपनी डोर को 

आओ आज खुद ही छुड़ा लें,

सबको प्यार देते हैं हम, क्यूं न थोड़ा प्यार आज खुद से करें हम।

बहु, बीवी, माँ , सबका फर्ज़ निभाते हैं,

फिर क्यूं खुद को भूल जाते हैं ?

चाहते हैं की कोई हम से प्यार करे, 

हमारे इस दामन को खुशियों से भर दे,

जब बाँटते है हम, खुशियाँ सभी को, 

तो फिर खुशियों की उम्मीद दूसरों से करें क्यों?

पति को चाहा तो खुद को भुलाया,

माँ बन कर जैसे खुद को मिटाया, 

जोड़े नए रिश्ते पर तोड़ा खुद ही को,

चलो आज ढूंढे खुद में खुद ही को।

न शिक्वा, न शिकायत, 

न आँसु, न हिदायत,

अपनी चाहतों को दे अपना आसमान,

खुद को निखारें, बने खुद का सहारा,

देखें नए सपने, दें खुद का साथ हम अब,

अपने ही दोस्त बन कर, चलें खुद के साथ हम अब,

भरें अपने जहाँ में रंग कुछ नए इस कदर,

कि मिल जाँए आज खुद से, एक नया दोस्त बन कर।

करें एक नई दोस्ती, एक नई शुरुआत अब,

उम्मीदें दूसरों से न हो, बस खुद से हो हर पल,

देंगे सभी को सब कुछ, पर लेंगे न किसी से कुछ,

थामेंगे हाथ अपना, साथ देंगे खुद का हर पल,

खुद के दोस्त बन कर, जानें खुद को इस तरह,

कि भूला न पाएँ कभी यह नया याराना।

न सोचें कि कोई नही है अपना, 

न सोचें कहाँ गया वो सपना,

दिल में रखें विश्व़ास हम अब,

कि खुद के साथ खड़े हैं हम अब,

करी खुद से जो दोस्ती, तो निभाऐंगे हर पल, 

करा खुद से ये वादा, भुलाऐंगे न अब हम,

आज खुद से दोस्ती कर के, करें खुद को खुश अब, 

थामे खुद का हाथ अब, चलें एक नए डगर पर।

हो साथ खुद.का, एहसास खुद का,

सपनों में अपने, विश्व़ास खुद का,

आओ आज फिर से खुद से दोस्ती कर लें।

न रोऐं छुप छुप के, न हो दिल की बात दिल में, 

बनें खुद का सहारा, दें साथ अब खुद ही का,

प्यार जो किया किसी से, दुखाया दिल अपना,

भरे आँखों में आँसू, दिया दर्द खुद.को,

आओ आज फिर से करो खुद से दोस्ती, 

दो प्यार खुद को भी, जिओ खुद भी जिंदगी।

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